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नॉरà¥à¤®à¤² और सिजेरियन के अलावा और à¤à¥€ कई तरीकों से हो सकती है डिलीवरी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के नौ महीनों में तो मà¥à¤¶à¥à¤•िलें आती ही हैं, साथ ही डिलीवरी के दौरान à¤à¥€ महिलाओं को असहनीय पीड़ा होती है।
आमतौर पर दो तरह की डिलीवरी के बारे में लोग जानते हैं, जैसे नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी। हालांकि, अब डिलीवरी के और à¤à¥€ कई तरीके आ गठहैं जिनकी मदद से पà¥à¤°à¤¸à¤µ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को आसान और दरà¥à¤¦ को कम किया जा सकता है। मेडिकल साइंस ने इतनी तरकà¥â€à¤•ी कर ली है कि अब कोई जोखिम या जटिलता होने पर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ डिलीवरी करवाई जा सकती है।यहां हम आपको डिलीवरी के तरीकों के बारे में बता रहे हैं।
​वैजाइनल डिलीवरी
यह पà¥à¤°à¤¸à¤µ का सबसे आम तरीका है और इस तरह की डिलीवरी को सबसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ और फायदेमंद माना जाता है। इसमें दरà¥à¤¦ को कम करने या पà¥à¤°à¤¸à¤µ को जलà¥â€à¤¦à¥€ करने के लिठकिसी à¤à¥€ तरह की दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। कà¥à¤› महिलाओं को शिशॠकी हारà¥à¤Ÿ रेट मॉनिटर करने जैसी मेडिकल हेलà¥â€à¤ª की जरूरत पड़ सकती है।
नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी को महिलाओं के लिठसबसे सही माना जाता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके बाद रिकवर करने में कम समय लगता है।
​सिजेरियन डिलीवरी
यदि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कोई परेशानी हो तो सिजेरियन डिलीवरी करवाई जाती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में मां के पेट पर कट लगाकर बचà¥â€à¤šà¥‡ को बाहर निकाला जाता है। यह à¤à¤• बड़ा ऑपरेशन होता है। कई महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा से बचने के लिठसिजेरियन का विकलà¥â€à¤ª पहले से ही चà¥à¤¨ लेती हैं।
वहीं, अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान किसी तरह की जटिलता का पता चले या पेट में जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ या तीन बचà¥â€à¤šà¥‡ हों या बचà¥â€à¤šà¤¾ उलà¥â€à¤Ÿà¤¾ हो गया हो तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ता है। इस सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को रिकवर करने में अधिक समय लगता है।
​असिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¡ वैजाइनल डिलीवरी
फोरसेपà¥â€à¤¸ : बड़े चमà¥â€à¤®à¤š जैसा दिखने वाला उपकरण जिसे फोरसेपà¥â€à¤¸ कहते हैं। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° इससे शिशॠके सिर को पकड़ कर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर निकालते हैं।
वैकà¥â€à¤¯à¥‚म à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥â€à¤¶à¤¨ : फोरसेपà¥â€à¤¸ की तरह ही वैकà¥â€à¤¯à¥‚म डिलीवरी होती है। इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° शिशॠके सिर पर पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• कप लगाकर बरà¥à¤¥ कैनाल से बाहर खींचते हैं।
à¤à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤“टोमी : इसमें योनि मà¥à¤– और गà¥à¤¦à¤¾ के बीच के ऊतक पर à¤à¤• कट लगाया जाता है। इस ऊतक को पेरिनियम कहते हैं। जब शिशॠको जलà¥â€à¤¦à¥€ से डिलीवर करवाना होता है, तà¤à¥€ इस तरह की डिलीवरी करवाई जाती है।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टोमी : इसमें डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤“टिक थैली के खà¥à¤²à¤¨à¥‡ वाली जगह पर à¤à¤• छोटा पà¥â€à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• हà¥à¤• लगाते हैं। इसमें योनि से तेजी से पानी निकलता है।
​वैजाइनल बरà¥à¤¥ आफà¥à¤Ÿà¤° सी-सेकà¥â€à¤¶à¤¨
हो सकता है कि जिन महिलाओं की पहले सिजेरियन डिलीवरी हà¥à¤ˆ हो, उनकी बाद में नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो। जब तक लेबर पेन शà¥à¤°à¥‚ नहीं होता, तब तक सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया जाता है। पहली बार में ऑपरेशन से डिलीवरी होने पर दूसरी बार नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी हो तो यूटà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ रपà¥â€à¤šà¤° का खतरा रहता है।
इस तरह कई पà¥à¤°à¤•ार की डिलीवरी होती हैं और पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के आधार पर ही डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° यह तय करते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला की किस तरह की डिलीवरी करनी है।
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